अल्मोड़ा। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए बड़े सपने देखने और नवाचार को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा केवल विकसित भारत-2047 के साक्षी नहीं, बल्कि उसके निर्माण के सारथी भी हैं।
गुरुवार को सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह अवसर विश्वविद्यालय के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी संस्थान के “फाउंडेशन पिलर्स” हैं, जिनकी उपलब्धियां और आदर्श आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेंगे।
राज्यपाल ने अल्मोड़ा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि सदियों से राष्ट्र को दिशा देती रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कौशल विकास, नवाचार, उद्यमिता और शोध को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। साथ ही आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र, हैप्पीनेस लैब, हरेला पीठ और लक्ष्मी देवी टम्टा केंद्र जैसी अभिनव पहलों को विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि शोध कार्य केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम बनना चाहिए। पर्वतीय कृषि, जड़ी-बूटी, जल संरक्षण और स्थानीय चुनौतियों के समाधान के लिए उपयोगी शोध की आवश्यकता पर भी बल दिया। साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे आधुनिक विषयों पर विश्वविद्यालय की पहल को उन्होंने समयानुकूल और दूरदर्शी बताया।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और दीक्षांत समारोहों में बड़ी संख्या में पदक प्राप्त करने वाली छात्राओं की उपस्थिति राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका निर्णायक होगी।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी सनातन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय में निहित है। युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, वेदों, उपनिषदों और भारतीय ज्ञान परंपरा पर गर्व करते हुए आधुनिक तकनीक को मानवीय संवेदनाओं और भारतीय मूल्यों के साथ जोड़ना चाहिए।
उन्होंने उत्तराखंड के युवाओं से “पहाड़ की जवानी और पहाड़ के पानी” को राज्य के विकास से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनना होगा। जैविक कृषि, जड़ी-बूटी, पर्यटन और स्टार्टअप के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जिनके माध्यम से पलायन की चुनौती का समाधान किया जा सकता है।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिमालय, नदियों और वनों का संरक्षण उत्तराखंड का प्राकृतिक और आध्यात्मिक दायित्व है। युवाओं को प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन स्थापित कर सतत विकास का मॉडल प्रस्तुत करना चाहिए।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
