देहरादून। राजधानी की यातायात व्यवस्था को नई दिशा देने वाली दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर से जुड़ी 12 किलोमीटर लंबी ग्रीनफील्ड चार लेन बाईपास परियोजना का गुरुवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने, गुणवत्ता बनाए रखने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता, मशीनरी, मानव संसाधनों और उपलब्ध संसाधनों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह परियोजना देहरादून के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना है, जिसके पूरा होने पर शहर में यातायात का दबाव कम होगा और स्थानीय नागरिकों व पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि परियोजना में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कार्यस्थलों पर पर्याप्त मशीनरी और श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, नियमित मॉनिटरिंग करने तथा सभी निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप कराने के निर्देश दिए। साथ ही बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक और यातायात प्रबंधन जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि भूमि, तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर आने वाली किसी भी समस्या का तत्काल समाधान किया जाए, ताकि निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।
करीब 716 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह 12 किलोमीटर लंबी ग्रीनफील्ड बाईपास परियोजना झाझरा से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-7 के नए पांवटा साहिब–बल्लूपुर खंड को जोड़ते हुए आशारोड़ी चेक पोस्ट के पास दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर से जुड़ेगी। परियोजना के अप्रैल 2027 तक पूर्ण होने की संभावना है।
परियोजना पूरी होने के बाद भारी एवं ट्रांजिट वाहनों को शहर के बाहर से डायवर्ट किया जा सकेगा, जिससे देहरादून में जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी और शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम एवं व्यवस्थित होगी।
निरीक्षण के दौरान नगर मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, तहसीलदार सदर सुरेंद्र देव तथा एनएचएआई के अधिकारी भी मौजूद रहे।
