देहरादून, 1 जुलाई 2026। मानसून के दौरान संभावित बाढ़, भूस्खलन और जलभराव जैसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में गुरुवार, 2 जुलाई को जनपद के सात संवेदनशील स्थानों पर मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों की आपदा प्रबंधन क्षमता, समन्वय और त्वरित राहत एवं बचाव व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा।
जिला प्रशासन के अनुसार यह मॉक ड्रिल दूधली क्षेत्र, सुसवा एवं सोंग नदी तटीय गौहरीमाफी (ऋषिकेश), कार्लीगढ़ क्षेत्र, लंबीधार–दृकिमाड़ी मोटर मार्ग (मसूरी), चकराता–मोरी मोटर मार्ग, सहसपुर–जमनीपुर स्थित आसन एवं स्वर्णा नदी तटीय क्षेत्र (विकासनगर) तथा सहस्रधारा क्षेत्र में आयोजित की जाएगी। प्रत्येक स्थान पर संभावित आपदा परिदृश्यों के अनुरूप राहत एवं बचाव कार्यों का वास्तविक अभ्यास किया जाएगा।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जनपद एवं तहसील स्तर पर गठित इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) के अधिकारियों और सभी संबंधित विभागों को निर्धारित समय पर पूरी तैयारी के साथ मॉक ड्रिल में अनिवार्य रूप से शामिल होने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यह केवल आपदा प्रबंधन की तैयारियों का परीक्षण है। इसलिए मॉक ड्रिल के दौरान किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से प्रशासन का सहयोग करने और आपदा के प्रति जागरूक रहने की भी अपील की।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मॉक ड्रिल?
उत्तराखंड में मानसून के दौरान हर वर्ष भारी बारिश, भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में वृद्धि जैसी घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में यह अभ्यास आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों की उपलब्धता और राहत एवं बचाव कार्यों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
