महासू वंदना से हरुल नृत्य तक दिखी जौनसार-बावर की सांस्कृतिक विरासत | राग पीलू की प्रस्तुति और सूफियाना कलाम ने मोहा दर्शकों का मन
देहरादून। विरासत महोत्सव-2026 की सांस्कृतिक संध्या लोक संस्कृति, भारतीय शास्त्रीय संगीत और आधुनिक गायकी के खूबसूरत संगम के नाम रही। स्पर्श जनजाति सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के कलाकारों ने जौनसारी लोकनृत्य के जरिए उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं को जीवंत किया। वहीं, सरोद वादक स्मित तिवारी की शास्त्रीय प्रस्तुति ने सुरों की गहराई से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध गायक जसवीर जस्सी ने अपने सूफियाना अंदाज, पंजाबी पॉप और बॉलीवुड संगीत से महफिल में उत्साह भर दिया। इस दौरान स्वर्गीय राजा रणधीर सिंह को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।
महासू वंदना से हरुल नृत्य तक दिखी जौनसारी संस्कृति की झलक
विरासत महोत्सव में स्पर्श जनजाति सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के कलाकारों ने जौनसार-बावर की लोक संस्कृति, आस्था और परंपराओं को मंच पर साकार किया। प्रस्तुति की शुरुआत लोक आराध्य देव महासू की वंदना से हुई। इसके बाद पारंपरिक लोकनृत्य और संगीत के माध्यम से क्षेत्र के लोकजीवन की झलक पेश की गई। प्रस्तुति का समापन पारंपरिक हरुल नृत्य के साथ हुआ, जिसने दर्शकों को जौनसारी संस्कृति की विशिष्ट पहचान से रूबरू कराया।
कार्यक्रम में पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत का अनूठा मेल देखने को मिला। विशाल ने ढोल, अमित ने दमाऊ, अनुज ने कीबोर्ड, प्रिंस ने ढोलक और ध्रुव ने ऑक्टापैड पर संगत की। संगीत संयोजन की जिम्मेदारी अनुज ने संभाली, जबकि चकराता के कुआनु ने भी प्रस्तुति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दल का नेतृत्व दुर्गेश राणा ने किया।
दल के नायक भगत सिंह राणा के साथ दुर्गेश राणा, अरविंद राणा, सचिन वर्मा, विशाल वर्मा, दिनेश चौहान, नितिन दयाल, मनोज, सुभाष, सूरज, अमित, ऋषभ, अनुज, प्रिंस, ध्रुव, आंचल, मिलन, वंशिका, कृति और आरती ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कलाकारों के सामंजस्य, ऊर्जा और पारंपरिक अंदाज ने दर्शकों को प्रभावित किया। प्रस्तुति के माध्यम से कलाकारों ने जौनसार-बावर की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी दिया।
राग पीलू में सरोद की तान ने मंत्रमुग्ध किए श्रोता
सांस्कृतिक संध्या में सरोद वादक स्मित तिवारी की शास्त्रीय प्रस्तुति आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। उन्होंने राग पीलू में आलाप और झाला की प्रस्तुति देकर सरोद के सुरों की गहराई और भारतीय शास्त्रीय संगीत की भावपूर्ण अभिव्यक्ति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर शुभ महाराज ने संगत की। सरोद और तबले के बीच सुर-ताल का सुंदर तालमेल प्रस्तुति की खास विशेषता रहा।
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद से संबंध रखने वाले स्मित तिवारी ने पांच वर्ष की उम्र में अपनी माता छाया तिवारी से ध्रुपद और तबले की शिक्षा लेनी शुरू की। इसके बाद उन्होंने अपने पिता चंद्रशेखर तिवारी से सरोद सीखना शुरू किया और नौ वर्ष की उम्र से मैहर घराने के सुब्रत पाल से इस कला का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वह पिछले 12 वर्षों से सरोद साधना में जुटे हैं।
स्मित तिवारी को संगीत के क्षेत्र में कई पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। इनमें संगीत नाटक अकादमी की प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता में शीर्ष पुरस्कार, संस्कृति मंत्रालय की ओर से वर्ष 2010 में युवा कलाकार के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति तथा वर्ष 2016-17 की सिटी-एनसीपीए युवा संगीतकार छात्रवृत्ति शामिल हैं। उनकी प्रस्तुति ने महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और सौंदर्य को विशेष स्थान दिलाया।
जसवीर जस्सी के सूफियाना कलाम से झूम उठी महफिल
विरासत महोत्सव की शाम को प्रसिद्ध गायक जसवीर जस्सी ने अपनी सुरीली आवाज और खास अंदाज से यादगार बना दिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत बुल्ले शाह के सूफी कलाम ‘आवणी सैयों’ से की। करीब 15 से 20 मिनट तक चली सूफियाना प्रस्तुति में आध्यात्मिक भाव और सूफी संगीत की गहराई देखने को मिली।
इसके बाद जस्सी ने पंजाबी पॉप और बॉलीवुड संगीत की ओर रुख किया, जिससे महफिल का माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया। उनकी गायकी में सूफी संगीत की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और आधुनिक संगीत की ऊर्जा का संगम नजर आया। श्रोताओं को संगीत की अलग-अलग विधाओं से रूबरू कराने वाली इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम में नई रौनक भर दी।
जसवीर जस्सी की प्रस्तुति में संगीतकारों ने भी अहम भूमिका निभाई। सनी अली और नवनीत नवी ने कीबोर्ड, सुमित जी ने ढोल, सनी मेहरा ने बेस गिटार, हर्ष ने ड्रम, सार्थक ने तबला और मोहम्मद कैफ ने कजाओ पर संगत की। बलबीर बीरा और हरसिमरन सन्नी ने पृष्ठभूमि गायन के माध्यम से प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया।
पंजाबी पॉप संगीत में ‘दिल ले गई कुड़ी गुजरात दी’ जैसे लोकप्रिय गीत से पहचान बनाने वाले जसवीर जस्सी ने सूफी, पंजाबी और हिंदी संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देश-विदेश में अनेक प्रस्तुतियां दी हैं और अभिनय के क्षेत्र में भी काम किया है।
लोक परंपरा, शास्त्रीय संगीत और आधुनिक गायकी का संगम
विरासत महोत्सव-2026 की यह सांस्कृतिक संध्या भारतीय कला और संगीत की विविधता का खूबसूरत उदाहरण बनी। एक ओर जौनसारी लोकनृत्य ने उत्तराखंड की पारंपरिक विरासत को जीवंत किया, दूसरी ओर सरोद की मधुर तान ने शास्त्रीय संगीत की गंभीरता और सौंदर्य को सामने रखा। वहीं, जसवीर जस्सी की सूफियाना गायकी और आधुनिक संगीत ने दर्शकों में उत्साह का संचार किया।
लोक संस्कृति से लेकर शास्त्रीय सुरों और आधुनिक गायकी तक की प्रस्तुतियों ने विरासत महोत्सव के सांस्कृतिक उद्देश्य को साकार करते हुए विभिन्न संगीत परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया।
