देहरादून/नई दिल्ली। Bhupender Yadav ने भारतीय वन सेवा (IFS) के मिड-करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों से संवाद करते हुए कहा कि “विकसित भारत का मार्ग हरित भारत से होकर गुजरता है।” नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने वैश्विक संरक्षण प्रयासों में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित किया।
यह संवाद Indira Gandhi National Forest Academy, देहरादून में चल रहे मिड-करियर ट्रेनिंग (MCT) कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय वन सेवा के अधिकारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अध्ययन दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे थे।
कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री Kirti Vardhan Singh, मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार, महानिदेशक (वन) एवं विशेष सचिव एस.के. अवस्थी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
“सेवानिवृत्ति के बाद भी खत्म नहीं होती वन अधिकारियों की जिम्मेदारी”
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं निभाते, बल्कि वे जीवनभर “मूक वनस्पतियों और वन्य जीवों की आवाज” बने रहते हैं। उन्होंने अधिकारियों से संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाते हुए कार्य करने का आह्वान किया।
भारत करेगा इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस शिखर सम्मेलन की मेजबानी
भूपेंद्र यादव ने बताया कि भारत जून के प्रथम सप्ताह में पहली बार आयोजित होने वाले International Big Cat Alliance (IBCA) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस सम्मेलन में दुनिया के करीब 95 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
चीता संरक्षण से लेकर जलवायु परिवर्तन तक हुई चर्चा
संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र में मंत्री ने चीता संरक्षण, कृत्रिम ऊष्मायन के जरिए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण, नदी तंत्र को बनाए रखने में टाइगर रिजर्व की भूमिका और पर्यावरणीय प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों के उपयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के शमन और एनडीसी लक्ष्यों को समय से पहले हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। साथ ही वन एवं वन्यजीव गवर्नेंस सिस्टम में सुधार और नई तकनीकों के प्रयोग पर भी जोर दिया जा रहा है।
राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने भी वैश्विक संरक्षण कूटनीति में भारत की मजबूत होती भूमिका को रेखांकित करते हुए विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया
