देहरादून। स्वस्थ जीवनशैली, समग्र स्वास्थ्य और भारतीय चिकित्सा परंपराओं के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (DJJS) के आरोग्य प्रकल्प के अंतर्गत विभिन्न शाखाओं में आयुर्वेद डे का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को आयुर्वेद को केवल उपचार की पद्धति न मानकर रोग निवारण, स्वास्थ्य संरक्षण और संतुलित जीवनशैली का समग्र माध्यम समझने का संदेश दिया गया।
आयोजन के दौरान विभिन्न शाखाओं में आयुर्वेदिक जीवनशैली, संतुलित आहार, ऋतुचर्या, दिनचर्या, प्राकृतिक स्वास्थ्य संरक्षण और रोगों से बचाव जैसे विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। विशेषज्ञों एवं वक्ताओं ने प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में सरल आयुर्वेदिक सिद्धांतों को अपनाने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।
बीमारी के बाद उपचार से बेहतर बचाव पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज की तेज रफ्तार जीवनशैली में स्वस्थ रहने के लिए केवल बीमारी होने के बाद उपचार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन को भी जीवनशैली का हिस्सा बनाना आवश्यक है। आयुर्वेद का सिद्धांत “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्” इसी सोच को मजबूत करता है, जिसमें स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा को विशेष महत्व दिया गया है।
शरीर, मन और आत्मिक स्वास्थ्य के संतुलन का संदेश
डीजेजेएस का आरोग्य प्रकल्प शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को परस्पर जुड़ा हुआ मानते हुए समाज में स्वास्थ्य जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी व्यापक दृष्टिकोण के तहत आयुर्वेद डे के अवसर पर लोगों को अपने भोजन, दिनचर्या और ऋतु के अनुरूप जीवनशैली के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की और स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेदिक सिद्धांतों को समझने के साथ उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने की दिशा में जानकारी प्राप्त की।
आयोजन का उद्देश्य आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ना और लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक, जिम्मेदार एवं आत्मनिर्भर बनाना रहा।
