बोले मुख्यमंत्री- संत परंपरा ने हमेशा समाज को सत्य, सेवा और करुणा का मार्ग दिखाया, नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही ऐसी फिल्में
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हाथीबड़कला स्थित सेंट्रियो मॉल के सिनेमा हॉल में प्रसिद्ध संत एवं आध्यात्मिक विभूति नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी। इस दौरान मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती गीता धामी सहित प्रदेश के कई मंत्री और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारत की संत परंपरा सदियों से समाज को सत्य, सेवा, करुणा, प्रेम और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाती आई है। नीम करौली बाबा का जीवन भी इसी महान परंपरा का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि बाबा की भक्ति, मानव सेवा और प्रत्येक व्यक्ति के प्रति प्रेम का संदेश आज भी बेहद प्रासंगिक है और समाज को सकारात्मक दिशा देने की क्षमता रखता है।
विश्वभर में आस्था का केंद्र है कैंची धाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि महान संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि भी है। नीम करौली बाबा का कैंची धाम आज देश-विदेश में श्रद्धा और आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान बना चुका है।
उन्होंने कहा कि संतों के जीवन, उनके विचारों और आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाले रचनात्मक प्रयास भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को नई पीढ़ी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भक्ति, सेवा और मानव कल्याण का संदेश देती है फिल्म
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि फिल्म ‘हनुमान अंश’ भारत की समृद्ध संत परंपरा, भक्ति, सेवा, प्रेम और मानव कल्याण की भावना को केंद्र में रखती है। फिल्म के माध्यम से नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और उनके जीवन से जुड़े उन मूल्यों को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जिनमें ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा, मानव सेवा, करुणा, प्रेम, विनम्रता और लोककल्याण प्रमुख हैं।
उन्होंने फिल्म के निर्माताओं और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा पर आधारित सकारात्मक एवं प्रेरणादायी फिल्में समाज में सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास न केवल हमारी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को सामने लाते हैं, बल्कि युवाओं और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ने का भी प्रभावी माध्यम बनते हैं।
