सॉन्ग और जमरानी बांध समेत जल संचय योजनाओं की प्रगति से केंद्र को कराया अवगत
देहरादून। उत्तराखंड में पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण को लेकर चल रही विभिन्न योजनाओं की प्रगति को प्रदेश के सिंचाई, लोक निर्माण, ग्रामीण निर्माण, पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने नई दिल्ली में आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में रखा।
जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में प्रतिभाग करते हुए महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन के अनुरूप उत्तराखंड में जल संसाधनों के विकास और उनके बेहतर उपयोग के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
3142 लिफ्ट नहरें और 1774 नलकूपों से सिंचाई सुविधा
महाराज ने बताया कि उत्तराखंड में वर्तमान में कुल 3,142 लिफ्ट नहरें और 1,774 नलकूप संचालित हैं। इनके माध्यम से लगभग 4,24,200 हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य की कुल सिंचन क्षमता लगभग 5,49,000 हेक्टेयर बताई गई।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में जल संसाधनों का समुचित उपयोग कर कृषि, पेयजल और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
देहरादून की प्यास बुझाएगा सॉन्ग बांध
मंत्री ने बताया कि देहरादून और आसपास के क्षेत्रों की वर्ष 2051 तक अनुमानित करीब 11 लाख आबादी को ग्रेविटी प्रणाली के माध्यम से प्रतिदिन 150 मिलियन लीटर सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सॉन्ग नदी पर सॉन्ग बांध का निर्माण किया जा रहा है।
यह बांध देहरादून से लगभग 12 किलोमीटर दूर प्रस्तावित है और इसकी ऊंचाई 133 मीटर है। बांध बनने के बाद करीब 3.65 किलोमीटर लंबी झील का निर्माण होगा। परियोजना को नवंबर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य प्रस्तावित है।
जमरानी बांध से हल्द्वानी समेत कई क्षेत्रों को लाभ
महाराज ने बताया कि हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों की वर्ष 2051 तक अनुमानित करीब 10.65 लाख आबादी को प्रतिदिन 117 मिलियन लीटर सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ सिंचाई सुविधा के विस्तार के लिए जमरानी बांध परियोजना पर कार्य चल रहा है।
रामगंगा नदी की सहायक गोला नदी पर हल्द्वानी से लगभग 10 किलोमीटर अपस्ट्रीम में निर्माणाधीन जमरानी बांध की ऊंचाई 150.6 मीटर है। परियोजना की कुल जल भंडारण क्षमता 208.60 बताई गई है। इसके माध्यम से नैनीताल, ऊधमसिंह नगर तथा उत्तर प्रदेश के बरेली और रामपुर जिलों के कुल करीब 57,065 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
जमरानी बांध परियोजना को जून 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य प्रस्तावित है।
गैरसैंण में भी बांध की योजना
महाराज ने बताया कि राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण और आसपास के गांवों में सुनिश्चित पेयजल आपूर्ति के लिए रामगंगा नदी पर गैरसैंण बांध के निर्माण का प्रस्ताव है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य आबादी वाले क्षेत्रों में भी सुनिश्चित पेयजल आपूर्ति के लिए कई बांध एवं बैराज परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
‘कैच द रेन’ अभियान से जल संरक्षण को बढ़ावा
जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन पर जोर देते हुए महाराज ने बताया कि ‘कैच द रेन’ कार्यक्रम के अंतर्गत प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, जल संचय और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है।
उन्होंने बताया कि राज्य में चाल-खाल, चेक डैम, रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सहित विभिन्न प्रकार की कुल 4,998 जल संचय संरचनाओं का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 3,980 संरचनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि शेष संरचनाओं पर निर्माण कार्य जारी है।
महाराज ने कहा कि उत्तराखंड में जल संसाधनों का संरक्षण केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
