देहरादून। संस्कृत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में उत्तराखंड ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारत-नेपाल शैक्षणिक सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है। प्रदेश के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार गैरोला ने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास में नेपाल के कार्यवाहक राजदूत महामहिम डॉ. सुरेन्द्र थापा से शिष्टाचार भेंट कर संस्कृत शिक्षा, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को विस्तार देने पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में दोनों देशों ने संस्कृत के बढ़ते वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए अनुसंधान, विद्वत्ता, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान तथा संयुक्त प्रकाशनों को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा ने कहा कि नेपाल की संस्कृत विद्वत्ता और साहित्यिक परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है तथा भारतीय विद्वानों के सहयोग से नेपाल में संस्कृत शिक्षा और अनुसंधान को नई गति मिलेगी।
संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार गैरोला ने बताया कि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह संस्कृत को सरल एवं जनसुलभ बनाने के पक्षधर हैं। उन्होंने युवाओं के बीच संस्कृत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समन्वय पर विशेष बल दिया है, जिससे संस्कृत के शुद्ध उच्चारण और अध्ययन को आधुनिक तकनीक के माध्यम से और अधिक सरल बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड संस्कृत संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में लगातार नए कदम उठा रहा है। राज्य के सभी 13 जनपदों में 13 संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं। आगामी 28 अगस्त 2026 को संस्कृत दिवस के अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम्, संस्कृत ग्रामों एवं विभिन्न गुरुकुलों में संगोष्ठियां, व्याख्यान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कार्यशालाएं तथा जन-जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे।
बैठक में जून 2025 में नेपाल में आयोजित 19वें विश्व संस्कृत सम्मेलन का भी उल्लेख किया गया, जिसमें विश्वभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा प्रदान की थी। दीपक कुमार गैरोला ने बताया कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (MoU) संयुक्त अनुसंधान, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान तथा संस्कृत अध्ययन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल का संबंध संस्कृत, सनातन परंपराओं, दर्शन, साहित्य और साझा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित है। सदियों से संस्कृत दोनों देशों के बीच बौद्धिक और आध्यात्मिक सेतु का कार्य करती रही है। बैठक में दोनों देशों के युवा शोधार्थियों और विद्वानों को संयुक्त शोध परियोजनाओं, शैक्षणिक आदान-प्रदान और संयुक्त प्रकाशनों के लिए प्रोत्साहित करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य एवं वरिष्ठ संस्कृत पत्रकार डॉ. सुनील जोशी भी उपस्थित रहे।
