रुड़की। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से रुड़की क्षेत्र के तीन इंटर कॉलेजों में ‘सुरक्षित बचपन’ विषय पर जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। नेशनल इंटर कॉलेज धनोरी, शिक्षा सदन इंटर कॉलेज मेहवड़ कला और जनता इंटर कॉलेज माजरी में आयोजित इन कार्यशालाओं में न्यायिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने छात्र-छात्राओं को बाल अधिकारों, शोषण से बचाव और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया।
मंगलवार को आयोजित कार्यशालाओं में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की कपिल कुमार त्यागी और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम रुड़की चौरब बत्रा ने विद्यार्थियों को सरल भाषा में उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने और अपने भविष्य को संवारने का अधिकार है। बच्चों को किसी भी प्रकार की असुरक्षित स्थिति या गलत व्यवहार का सामना करना पड़े तो उन्हें डरने या चुप रहने के बजाय अपने माता-पिता, शिक्षकों अथवा पुलिस को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
गुड टच-बैड टच और पॉक्सो एक्ट की दी जानकारी
कार्यशाला में बच्चों को गुड टच और बैड टच के बीच अंतर समझाया गया। साथ ही पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में मदद लेना क्यों जरूरी है। न्यायिक अधिकारियों ने बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और जरूरत पड़ने पर उचित माध्यम से शिकायत करने के लिए प्रेरित किया।
साइबर अपराधों से बचने के बताए तरीके
पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, अपनी निजी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने तथा ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल माध्यमों का सावधानीपूर्वक उपयोग कर साइबर अपराधों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
कार्यशाला में कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कमल मोहन भंडारी, एसएसआई रमेश कुमार सैनी, एसआई विनोद गोला और इमलीखेड़ा चौकी प्रभारी अमित नौटियाल सहित संबंधित कॉलेजों के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन (डी-15): रुड़की क्षेत्र के इंटर कॉलेजों में ‘सुरक्षित बचपन’ कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, कानूनी सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी देते न्यायिक अधिकारी एवं पुलिसकर्मी।
